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सफलता के आवश्यक सूत्र


इन्सान पूरे जीवन सफलता और असफलता से घिरा रहता हैं , फिर भी कुछ ऐसे गुण हैं जिनसे सफलता मिलने

 में बहुत  आसानी  होती हैं अगर हम सब लोग उनका संयम और द्रढ़ता से पालन करे हमे सफलता आसानी से

प्राप्त हो सकती हैं |

सफलता के सूत्र-

1-   बदलाव से डरते नही-  बदलाव एक सतत प्रकिर्या हैं  | हर छण कुछ न कुछ बदलता रहता हैं | हर समय एक  जैसा नहीं रहता है यही जीवन का नियम है | सफल व्यक्ति लचीले स्वाभाव के होते है | विपिरीत परिस्थिथि        आने पर डरते नहीं है डट के मुक़बुला करते है और गलतियों को दोहराते नहीं है |


    
2-  आगे की सोचते हैं- सफल व्यक्ति हमेशा आगे की सोचते हैं| हमेशा सकारात्मक सोच रखते हैं| छोटी -2 बातो

को तौल नही देते हैं | उन्हें हमेशा ये ध्यान रहता हैं सब कुछ अपने अनुसार नही होता हैं यही प्रकृति का नियम हैं |

3-    अपने आप पर नियंत्रण- उन्हें अपने आप पर हमेशा विश्वास होता हैं और उन्हें ये डर नहीं होता हैं की कोई 

उनका साथ नही देगा तो वो अकेले पड जायेंगे .|

4-  धैर्यवान होते है- वो लोग बहुत धैर्यवान होते हैं जोकिसी  भी मंजिल को पाने का बहुत बड़ा गुण हैं. |

    
5- अपनी शक्ति का सदुपयोग- सफल व्यक्ति अपनी ऊर्जा का सही प्रयोग करते हैं. समय की कीमत को अच्छे 

से समझते हैं|


   

6- चुनोतियों से घबराते नही हैं -   और अपने सतत प्रयास से अपनी अपनी मंजिल को पा जाते हैं |


               अभिशाप नहीं वरदान हैं विफल्तायें......


जीवन मे मिलने वाली असफलताओं से आदमी बहुत दुखी हो जाता है, एक तरह से टूट जाता है |
ऐसे समय मे उसे सही मार्गदर्शन ना मिले तो उसका भ्रमित होना  स्वाभाविक है | असफलता मिलने
पर एक छण तो ऐसे लगता की जैसे सब कुछ ख़त्म हो गया हो सारी मेहनत व्यर्थ हो जाती है और 
ना जाने कितने विचार मन मे आ जाते है जिनसे मन और दुखी होता है|

ऐसी परिस्तिथि मे महान
लोग कहते है की ‘’ हर आदमी को अपनी नाकामयाबी को खुले दिल से स्वीकार करना चाहिए
क्योकि वही से कामयाबी का रास्ता खुलता है “ |
किसी भी कार्य मे सफलता या असफलता का सिलसिला जीवन भर चलता रहता है, और शायद ही
कोई आदमी हो जिसे किसी भी कार्य में असफलता देखने को न मिली हो | जब हम कुछ पाना चाहते
है तो बहुत मेहनत करते है पर जरूरी नहीं ही की जैसा हमने सोचा है वैसा ही हो  , जैसा हमने चाहा
उसमे फेरबदल भी हो सकता है | हम सिर्फ कार्य कर सकते है लेकिन उसके परिणाम स्वरुप हमें जो
भी मिले उसे हमें दिल से स्वीकार करना चाहिए |

जब हमे असफलता मिलती है तो हमे बहुत क्रोध आता है पर उससे कुछ हासिल नहीं होता| हम सिर्फ
और सिर्फ खुद को परेशान करते है उस वक़्त हमे सबसे ज्यादा जरूरत होती है खुद पर काबू पाने की
और अपनी गलतियों से सीख लेकर सही दिशा मे क़दम भड़ाने की |
जब भी असफलताओ की स्वीकार करते है तभी हम अपने लिए नए द्वारो का सर्जन कर पाते है 
परन्तु ऐसा नहीं करते है तो अपने लिए कठिनाई को नियोता देते है इसलिए हमे असफलताओ को
स्वीकारते हुए अपने लिए बाकी रास्तों को खुले रहने देना चाहिए |

'एल्वा एडिसन"

सबसे बड़े उदहारण जो बल्ब बनाने की क्रिया में हज़ारों बार विफल हुए परन्तु उन्होंने 
तब भी हार नहीं मानी और सारी दुनिया को रौशनी देकर अपना सपना पूरा किया अगर वे हार  मान
जाते ओ शायद आज भी लाखों घरों में अँधेरा होता |

 जैसे छोटी सी चीटी भी पहाड़ पर कई बार
फिसलने पर भी हार नहीं मानती वैसे ही हमे भी उस चीटी की तरह अपने मन मैं विश्वास रखना चाहिए  क्योकि सफल लोग कहते है की –

 ‘’ कमजोर तब रुकते है जब थक जाते है और विजेता तब रुकते है जब वो जीत जाते है ‘’ ..............................................................................................................................................   

           

                           

                      
                  मंज़िल तुझे पुकार रही हैं


1-  मै गुमनामी के अंधेरो मैं बैठा हुआ सोच रहा हूँ

   की कोई तो राह मुझे दिखाई तो दे

   असफलताओ की चपेट मुझे पीछे कर रही हैं

   तभी सूरज की एक किरण मुझसे आकर कहती हैं
   
   मंज़िल तुझे पुकार रही हैं , मंज़िल तुझे पुकार रही हैं ||


2  लाखों मील असफलताओ के पीछे चलकर थक गया हुआ मैं

   सूरज की गरम लपटों से जलकर गिर गया हूँ मैं

   तभी तरुवर की एक छाया आकर मुझसे कहती है

   तू रुक मत तू थक मत मैं रहूंगी तेरे साथ तेरी साथी बनकर
   
   मंज़िल तुझे पुकार रही हैं ,मंज़िल तुझे पुकार रही हैं ||


3.   नदियाँ के जल की विपरीत दिशा  मैं आगे बढ़ता हुआ 


     लेकिन  लहेरे  मुझे पीछे धकेल रही है   


      तभी तरुवर  का एक  पत्ता मुझे आकर कहता है  

                                              
   डूबता हैं वो जिनको मंजिल दिखाई देती नहीं हैं

   तैर जाते हैं वो जिनके होसलो मैं उड़ान होती हैं

   तू रुक मत तू थक मत
  
    मंज़िल तुझे पुकार रही हैं, मंज़िल तुझे पुकार रही हैं ||


4.  भरकर मन मैं जोश और उमंग बढ़ता चल अपने केंद्र की और

    न डर तू अंधकार से न लहेरो की चपेटों से 

    ना डर तू हवाओ के रुख से 
  
    धरा का जर्रा जर्रा बोलेगा –
   
    मंज़िल तुझे पुकार रही हैं  मंज़िल तुझे पुकार रही हैं ||








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