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                         बेटियां

चांदनी उतरी है मेरे अंगना

बजा ढोलिये ढोल जोर से

बेटी ने घर जनम लिया

 गत जन्मो में मैंने कैसा कितना जाने पुण्य किया

उन कर्मो का फल पाया हैं घर बेटी का जन्म आया है

राम रखियो खुश बेटी को होवे कभी तंग ना

चांदनी उतरी है मेरे अंगना ||


तू खुश है तो मै खुश हूँ कैसे राम लिखे लेखा

बाबुल की भीगी आँखों को किसने पोछा औ देखा

ले आशीष पिता की बेटी छुटे मेहँदी ना

चांदनी उतरी है मेरे अंगना ||


जब लोटे सजना के घर से ऐसी हंसी अधर धरना

मै ये समझूँ खुश है बेटी दुःख की बाते मत करना

सूरज चन्द्र जब तक चमके खनके तोरे कंगना


चांदनी उतरी है मेरे अंगना ||



                                                                              चिंतन
बेटी अन्तस की गज़ल बेटा मन का गीत

दोनों ही प्यारे मुझे ,दोनों से ही प्रीत 

राजा हो या रंक हो दुखड़ा एक समान

जिसकी बेटी खुश रहे बस वो ही धनवान

मुन्ना तो सुनता नहीं क्या हैं अजब रिवाज

मुन्नी उठकर दौड़ती जब जब दू आवाज ||

            
घर की सब चहल –पहल हैं बेटी,

जीवन में खिला कमल हैं बेटी 

कभी धूप गुनगुनी सुहानी

कभी चंदा शीतल हैं बेटी ||


शिक्षा गुण संस्कार रोप दो

फिर बेटो से सबल हैं बेटी

सहारा दो अगर विश्वास का

तो पावन गंगाजल हैं बेटी ||


प्रकर्ति के सद्गुण सींचो

तो प्रकति की निश्छल हैं बेटी

क्यों डरते हो पैदा करने से

अरे आने वाला कल हैं बेटी ||

                                                                                                                   

                         

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